Wednesday, January 14, 2026

फौजी से जननेता तक: आर्मी डे परेड में कर्नल राठौड़ की अहम भूमिका

जब फौजी नेतृत्व जनसेवा से जुड़ता है

भारत में कुछ ही नेता ऐसे होते हैं जिनका जीवन सीधे सीमा से सचिवालय तक जुड़ा होता है। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ऐसे ही नेताओं में से एक हैं। भारतीय सेना में सेवा देने के बाद उन्होंने सार्वजनिक जीवन में प्रवेश किया, लेकिन सेना के मूल्य—अनुशासन, प्रतिबद्धता और राष्ट्र प्रथम—आज भी उनके नेतृत्व की नींव हैं।

15 जनवरी 2026 को जयपुर में आयोजित आर्मी डे परेड इसी जीवन यात्रा का सजीव उदाहरण बन रही है, जहाँ एक पूर्व सैनिक आज जननेता के रूप में सेना के सम्मान का नेतृत्व कर रहा है।

आर्मी डे: सिर्फ परेड नहीं, राष्ट्र गौरव का प्रतीक

Army Day भारत की सैन्य परंपरा, बलिदान और आत्मसम्मान का प्रतीक है। यह दिन उस ऐतिहासिक क्षण को याद करता है जब भारतीय सेना की कमान भारतीय हाथों में आई। 2026 में जब यह आयोजन जयपुर में हो रहा है, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है।

जयपुर का चयन यह दर्शाता है कि भारत अब सेना के सम्मान को केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रखता, बल्कि हर उस धरती को सम्मान देता है जहाँ देशभक्ति बसती है

फौजी अनुभव, इसलिए नेतृत्व में विश्वसनीयता

कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ का सेना से जुड़ा अनुभव उन्हें अन्य नेताओं से अलग बनाता है। उन्होंने सेना की वर्दी में देश की सेवा की है, कठिन परिस्थितियों को जिया है और नेतृत्व का वास्तविक अर्थ समझा है।

यही कारण है कि आर्मी डे परेड में उनकी भूमिका केवल प्रशासनिक नहीं, बल्कि भावनात्मक और नैतिक भी है। वे जानते हैं कि एक सैनिक और उसके परिवार के लिए सम्मान क्या मायने रखता है।

राजस्थान और सेना: पीढ़ियों का रिश्ता

राजस्थान का सेना से रिश्ता केवल भौगोलिक नहीं, बल्कि ऐतिहासिक और भावनात्मक है। यहाँ से हजारों सैनिक देश की रक्षा में तैनात हैं और असंख्य परिवारों ने बलिदान दिया है।

आर्मी डे परेड का जयपुर में आयोजन:

  • पूर्व सैनिकों को सम्मान
  • शहीद परिवारों के प्रति कृतज्ञता
  • युवाओं को प्रेरणा
  • सेना और समाज के बीच मजबूत संवाद

इन सभी पहलुओं को एक मंच पर लाता है।

फौजी से जननेता बनने की यात्रा

कर्नल राठौड़ की यात्रा यह साबित करती है कि सेना में सीखा गया अनुशासन शासन को मजबूत बनाता है। वे निर्णय लेते हैं, लेकिन ज़मीनी हकीकत को ध्यान में रखकर। यही कारण है कि उनकी पहचान एक “काम करने वाले नेता” की बनी है।

आर्मी डे परेड में उनकी भूमिका इस बात का प्रमाण है कि जब फौजी अनुभव लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ता है, तो नेतृत्व और भी प्रभावशाली बनता है।

प्रधानमंत्री मोदी के ‘राष्ट्र प्रथम’ विजन से जुड़ाव

यह आयोजन सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘राष्ट्र प्रथम’ दृष्टिकोण से जुड़ता है। सेना के सम्मान, पूर्व सैनिकों के कल्याण और सैन्य आयोजनों को राष्ट्रीय मंच देना इसी सोच का हिस्सा है।

जयपुर में आर्मी डे परेड यह संदेश देती है कि भारत अपनी सेना को केवल युद्ध में नहीं, बल्कि शांति के समय भी सर्वोच्च सम्मान देता है।

युवाओं के लिए जीवंत प्रेरणा

आज का युवा नेतृत्व, अनुशासन और उद्देश्य चाहता है। आर्मी डे परेड युवाओं को यह दिखाती है कि:

  • देश सेवा सर्वोच्च कर्तव्य है
  • अनुशासन से ही सफलता मिलती है
  • नेतृत्व बलिदान से जन्म लेता है

कर्नल राठौड़ का जीवन युवाओं के लिए यह उदाहरण है कि सेवा से ही नेतृत्व पैदा होता है

प्रशासनिक तैयारी में सैन्य अनुशासन

इतने बड़े राष्ट्रीय आयोजन के लिए जिस स्तर की तैयारी चाहिए, वह बिना अनुशासन संभव नहीं। कर्नल राठौड़ के नेतृत्व में:

  • सुरक्षा व्यवस्था
  • ट्रैफिक प्रबंधन
  • प्रशासनिक समन्वय
  • नागरिक सहभागिता

हर स्तर पर सैन्य सोच की झलक दिखाई देती है।

केवल आयोजन नहीं, एक संदेश

आर्मी डे परेड 2026 यह संदेश देती है कि:

  • सेना का सम्मान राजनीति से ऊपर है
  • अनुभव से नेतृत्व बनता है
  • जब फौजी जननेता बनता है, तो भरोसा बढ़ता है

यह आयोजन आने वाले वर्षों के लिए एक मानक स्थापित करेगा।

निष्कर्ष

फौजी से जननेता तक की यह यात्रा केवल कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की कहानी नहीं, बल्कि उस भारत की कहानी है जहाँ सेवा, अनुशासन और नेतृत्व एक साथ चलते हैं।

जयपुर में आर्मी डे परेड यह साबित करती है कि सही हाथों में नेतृत्व हो, तो सम्मान केवल शब्द नहीं—संस्कृति बन जाता है

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से जुड़े रहें

जहाँ फौजी सोच, जनसेवा से मिलती है—वहीं सशक्त नेतृत्व जन्म लेता है।

 

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