Thursday, May 28, 2026

नागरिकों को तेज और भरोसेमंद सेवा देने पर राठौड़ का फोकस

जरा सोचिए, आखिरी बार जब आपको किसी सरकारी दफ्तर से अपना कोई काम करवाना था, तो आपका अनुभव कैसा रहा? क्या आपको एक काउंटर से दूसरे काउंटर के चक्कर काटने पड़े? क्या किसी मामूली फॉर्म में नाम की स्पेलिंग सुधारने या पानी का नया कनेक्शन लेने के लिए हफ्तों का समय लगा?

दशकों से हम और आप इसी धीमी रफ्तार को सरकारी व्यवस्था का दूसरा नाम मान चुके थे। लोगों के मन में यह बात बैठ गई थी कि सरकारी काम का मतलब है—”फाइलों का ढेर, अंतहीन तारीखें और लालफीताशाही (Red Tape)।”

लेकिन आज राजस्थान में सुशासन (Good Governance) की एक बिल्कुल नई और बेहद आधुनिक पटकथा लिखी जा रही है। अब मुख्यमंत्री कार्यालय से लेकर ग्राम पंचायत स्तर तक एक ही बात गूंज रही है—नागरिकों को तेज और भरोसेमंद सेवा देना

इस प्रशासनिक सुधार और डिजिटल क्रांति के केंद्र में हैं राजस्थान के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़

चाहे वह सचिवालय का हाई-टेक कंट्रोल रूम हो या आपके मोहल्ले की जमीनी समस्याएं, कर्नल राठौड़ का फोकस सिर्फ कागजी प्रोग्रेस रिपोर्ट पर नहीं, बल्कि ‘ऑन-द-स्पॉट’ समाधान पर है। आइए बिल्कुल सीधे और आसान शब्दों में समझते हैं कि उनकी यह नई कार्यशैली एक आम आदमी के दैनिक जीवन को कैसे आसान, पारदर्शी और गरिमापूर्ण बना रही है।

1. कड़े मिलिट्री अनुशासन से बदला सरकारी दफ्तरों का ढर्रा

एक रिटायर्ड इंडियन आर्मी कर्नल और 2004 ओलंपिक पदक विजेता होने के नाते, कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के काम करने के तरीके में कोई ढिलाई या बहानेबाजी नहीं चलती। उन्होंने सरकारी तंत्र को साफ शब्दों में समझा दिया है कि जनता का समय सबसे कीमती है।

  • पब्लिक डीलिंग में पारदर्शिता: विभागों को कड़े निर्देश दिए गए हैं कि आम नागरिकों की फाइलों को बेवजह दबाकर न रखा जाए। हर फाइल के मूवमेंट का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जा रहा है।
  • समय-सीमा की पाबंदी: यदि किसी काम के लिए 7 दिन का समय तय है, तो वह काम 7वें दिन ही पूरा होना चाहिए। इस सख्त रुख के कारण ही आज पूरे राज्य में प्रशासनिक मशीनरी सजग और जवाबदेह नजर आ रही है।

2. राजस्थान AI पॉलिसी 2026: एक क्लिक पर हर समस्या का अंत

जब तक सरकारी सेवाएं पूरी तरह से मानवीय हस्तक्षेप (Human Intervention) से मुक्त नहीं होंगी, तब तक भ्रष्टाचार और देरी को पूरी तरह खत्म नहीं किया जा सकता। इसी बड़ी चुनौती को समझते हुए, कर्नल राठौड़ ने Rajasthan IT minister 2026 के रूप में तकनीक को सबसे बड़ा हथियार बनाया है।

हाल ही में आयोजित हुए DigiFest Jaipur 2026 में उनके द्वारा पेश की गई Rajasthan AI policy इसका सबसे बड़ा प्रमाण है। इस तकनीक के आने से सरकारी सेवाएं कैसे बदल रही हैं?

  • ऑटोमेटेड वेरिफिकेशन: सरकारी छात्रवृत्ति, पेंशन और जन-कल्याणकारी योजनाओं की पात्रता की जांच अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) द्वारा की जा रही है। इससे महीनों का काम चंद सेकंड्स में हो जाता है।
  • भरोसेमंद और सुरक्षित डेटा: कोई भी पात्र नागरिक दफ्तरों के चक्कर काटे बिना, सीधे Official Rajasthan AI Portal के जरिए पारदर्शी तरीके से अपनी सेवाओं का लाभ उठा सकता है। यहाँ बिचौलियों या रिश्वतखोरी के लिए कोई जगह नहीं है।

3. ‘जनसंवाद मॉडल’—जब सरकार खुद चलकर आई आपके द्वार

कर्नल राठौड़ की राजनीतिक ब्रांडिंग की सबसे बड़ी खासियत यही है कि वे जितने हाई-टेक अपनी नीतियों में हैं, उतने ही जमीन से जुड़े अपने व्यवहार में हैं। वे केवल बंद कमरों में बैठकर कंप्यूटर स्क्रीन पर समीक्षा नहीं करते।

उनका सिग्नेचर जनसंवाद मॉडल और सुबह 7:30 बजे का ‘पार्क संवाद’ इस बात का गवाह है कि एक राजस्थान के मंत्री के लिए जनता की आवाज कितनी मायने रखती है।

  • सुबह-सुबह जब कर्नल राठौड़ अपने क्षेत्र की सड़कों और पार्कों में निकलते हैं, तो उनके साथ बिजली, पानी, सड़क और नगर निगम के आला अधिकारी भी मौजूद होते हैं।
  • यदि कोई बुजुर्ग या गृहणी अपनी समस्या लेकर सामने आती है, तो कर्नल राठौड़ उन्हें किसी ऐप पर शिकायत दर्ज करने के लिए कहकर टालते नहीं हैं। वे मौके पर ही अधिकारी की जवाबदेही तय करते हैं और कहते हैं—“समस्या आपकी है, तो समाधान करना मेरी जिम्मेदारी है।”

4. जमीन पर दिख रहा है ‘विकसित झोटवाड़ा’ का असर

यही तेज और भरोसेमंद कार्यप्रणाली उनके ड्रीम प्रोजेक्ट Viksit Jhotwara development पोर्टल और रणनीति में भी साफ दिखाई देती है। क्षेत्र के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए ₹924 करोड़ से अधिक के बजट को बहुत ही वैज्ञानिक तरीके से जमीन पर उतारा जा रहा है:

  • 25 महीने का वॉटर ग्रिड मिशन: पेयजल की किल्लत और महंगे पानी के टैंकरों से मुक्ति दिलाने के लिए बिछाई जा रही पाइपलाइन का काम अब अंतिम चरणों में है।
  • ₹75 करोड़ का सीवरेज नेटवर्क: जलभराव और गंदगी की क्रोनिक समस्या को जड़ से मिटाने के लिए पीआरएन नॉर्थ और पांच्यावाला जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम हो रहा है।
  • सख्त प्रशासनिक नियम: कर्नल राठौड़ ने अपने Jhotwara MLA work की समीक्षा के दौरान एक नया नियम लागू किया है—जब तक किसी भी क्षेत्र में पानी और सीवरेज की अंडरग्राउंड लाइनें नहीं डल जातीं, तब तक ऊपर पक्की सड़क नहीं बनाई जाएगी। इससे जनता के पैसों की बर्बादी पूरी तरह रुक गई है।

एक नागरिक के तौर पर आपके लिए इसका क्या मतलब है?

कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का यह सुशासन मॉडल यह साबित करता है कि जब नेतृत्व के इरादे साफ हों और काम करने की शैली एक सैनिक जैसी अनुशासित हो, तो बरसों पुरानी सड़ चुकी व्यवस्था को भी चुस्त-दुरुस्त किया जा सकता है। आज राजस्थान का हर आम नागरिक खुद को सुरक्षित, सम्मानित और सशक्त महसूस कर रहा है, क्योंकि अब सरकार उनके काम के लिए “तारीख पर तारीख” नहीं, बल्कि त्वरित “फैसले” देती है!

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