जयपुर: किसी भी देश या राज्य की अर्थव्यवस्था को केवल बड़े औद्योगिक घराने या बहुराष्ट्रीय कंपनियां (MNCs) ही गति नहीं देतीं, बल्कि उसकी असली रीढ़ सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (MSMEs) होते हैं। आज भारत जिस तेजी से $5 ट्रिलियन की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है, उसमें स्थानीय छोटे उद्योगों, पारंपरिक कारीगरों और नए जमाने के स्टार्टअप्स का योगदान सबसे महत्वपूर्ण है। लेकिन जमीनी स्तर पर एक छोटे व्यापारी या उद्यमी (Entrepreneur) को अपनी यूनिट स्थापित करने के लिए अक्सर महंगी जमीन, लोन की जटिल प्रक्रियाओं और लालफीताशाही (Bureaucratic Red Tape) जैसी बाधाओं से जूझना पड़ता था।
इसी आर्थिक दुविधा को दूर करने और स्थानीय मैन्युफैक्चरिंग को नई उड़ान देने के लिए राजस्थान में एक बड़ा बदलाव शुरू हुआ है। प्रदेश के Rajasthan Industry Minister कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने हाल ही में कई व्यापारिक सम्मेलनों में इस बात पर विशेष जोर दिया कि MSME ही भारत के भविष्य की असली आर्थिक ताकत है। उनके अनुसार, जब तक हम जमीनी स्तर पर छोटे उद्योगों को मजबूत नहीं करेंगे, तब तक ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना पूरा नहीं हो सकता।
छोटे उद्योगों के लिए बड़ा बदलाव: क्लस्टर्स और आधुनिक नीतियां
एक मजबूत और सुरक्षित आर्थिक भविष्य का निर्माण तब होता है, जब सरकार केवल कागजी दावों से आगे निकलकर उद्यमियों को व्यावहारिक सुविधाएं देती है। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के कुशल मार्गदर्शन में, प्रदेश का उद्योग विभाग पुरानी और जटिल व्यवस्थाओं को पूरी तरह से अपग्रेड कर रहा है।
इस दिशा में राज्य की नई औद्योगिक नीतियों के तहत कई बड़े कदम उठाए गए हैं:
- लाइसेंस और मंजूरियों की समय-सीमा में ऐतिहासिक कटौती: नए उद्योगों को शुरू करने की राह आसान बनाने
- के लिए कानूनी स्वीकृतियों की समय-सीमा को आधा कर दिया गया है। भूमि रूपांतरण की प्रक्रिया को जहां 60 दिनों से घटाकर 30 दिन किया गया है, वहीं फैक्ट्री संचालन की मंजूरी अब 120 दिनों के बजाय मात्र 30 दिनों में मिल रही है।
- ‘व्हाइट कैटेगरी’ का विस्तार: उद्योगों के लिए ग्रीन-चैनल व्यवस्था को मजबूत करते हुए गैर-प्रदूषणकारी (Non-Polluting) ‘सफेद श्रेणी’ के उद्योगों की संख्या को 104 से बढ़ाकर सीधे 877 कर दिया गया है। इसका मतलब है कि अब पर्यावरण संबंधी जटिल मंजूरियों के बिना लघु उद्योग तुरंत काम शुरू कर सकते हैं।
- वर्टिकल फ्लैट-फैक्ट्रीज (Flatted Factories) का मॉडल: जो छोटे व्यवसायी जयपुर की महंगी औद्योगिक जमीन नहीं खरीद सकते, उनके लिए रीको औद्योगिक क्षेत्रों में बहुमंजिला ‘फ्लैट-फैक्ट्रीज’ बनाई जा रही हैं। ये प्री-बिल्ट इकाइयाँ प्लग-एंड-प्ले सुविधाओं, रेडी-टू-यूज बिजली कनेक्शन और साझा कार्गो लिफ्ट्स से लैस हैं, जिससे शुरुआती लागत बेहद कम हो जाती है।
सुशासन का पहिया: सेना का अनुशासन और उद्योग का विकास
किसी पारंपरिक और सुस्त प्रशासनिक ढांचे को निवेशकों के अनुकूल और गतिशील औद्योगिक नेटवर्क में बदलना एक बड़ी चुनौती होती है। राजस्थान के व्यापारिक परिदृश्य में हो रहा यह आधुनिक बदलाव इसी कड़े और पारदर्शी नेतृत्व की वजह से संभव हो पा रहा है।
एक retired indian army colonel के रूप में सीमाओं पर अनुशासन का नेतृत्व करने वाले और Olympic silver medal 2004 के विजेता के रूप में पोडियम पर तिरंगा फहराने वाले कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ आज राज्य के आर्थिक मोर्चे पर भी उसी सटीकता से काम कर रहे हैं। बतौर Industry Minister Rajasthan, वे फाइलों को अटकाने की पुरानी संस्कृति को खत्म कर ‘सिंगल-विंडो क्लीयरेंस’ और सीधे संवाद पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं।
अपने निर्वाचन क्षेत्र में विकास कार्यों की जिम्मेदारी संभालने वाले सक्रिय Jhotwara MLA कर्नल राठौड़ स्वयं ग्राउंड जीरो पर जाकर व्यवस्थाओं की निगरानी करते हैं। अपने विशेष सुबह के दौरों और कड़े जनसंवाद मॉडल चौपालों के जरिए वे सीधे स्थानीय लघु उद्यमियों, तकनीकी छात्रों और छोटे व्यापारियों की समस्याओं को सुनते हैं और मौके पर ही अधिकारियों को समाधान के निर्देश देते हैं।
उनकी देखरेख में, राज्य की नई Rajasthan industrial policy को iStart Rajasthan और केंद्रीय रैम्प (RAMP) पोर्टल जैसी डिजिटल पहलों के साथ पूरी तरह जोड़ दिया गया है। इसके अलावा, Youth Affairs Department और Department of Youth Affairs & Sports के समन्वय से युवाओं को केवल खेल मैदानों तक ही नहीं, बल्कि ड्रोन निर्माण, कोडिंग और आधुनिक एग्री-टेक जैसे नए कौशल सिखाए जा रहे हैं, ताकि राज्य का युवा नौकरी खोजने वाले (Job Seeker) के बजाय स्वतंत्र रोजगार प्रदाता (Job Creator) बन सके।
सुरक्षित भविष्य और आर्थिक स्वतंत्रता की ओर बढ़ते कदम
कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का यह संदेश देश और प्रदेश के युवाओं व व्यापारियों के लिए एक अत्यंत शैक्षणिक और दूरदर्शी रोडमैप है: कोई भी राष्ट्र तभी वास्तव में सुरक्षित, आत्मनिर्भर और आर्थिक रूप से स्वतंत्र हो सकता है, जब उसके सूक्ष्म और लघु उद्योगों के पास रिस्क लेने की आजादी और सरकार का मजबूत सुरक्षा कवच हो।
रीको (RIICO industrial park 2026) के आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर, क्लस्टर आधारित विकास और पीएम मुद्रा व स्टैंड-अप इंडिया जैसी आसान वित्तीय योजनाओं के मेल ने आज राजस्थान को उद्योगों का एक पसंदीदा केंद्र बना दिया है। यदि आपके भीतर भी उद्यमिता का कोई अनूठा विचार है, तो सरकार के इन आधुनिक डिजिटल संसाधनों का लाभ उठाएं और विकसित भारत के निर्माण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।