घर में जब मां, बहन या बेटी बीमार होती है, तो पूरा परिवार परेशान हो जाता है। खासकर जब बात गर्भावस्था (Pregnancy) या महिलाओं की गंभीर बीमारियों की हो, तो तुरंत एक अच्छे डॉक्टर की जरूरत होती है। जोबनेर और उसके आसपास के गांवों के परिवारों के लिए यह जरूरत पिछले 22 सालों से एक बहुत बड़ा संघर्ष बनी हुई थी।
जोबनेर के स्थानीय सरकारी अस्पताल (CHC) में कोई स्त्री रोग विशेषज्ञ (Gynecologist) डॉक्टर न होने के कारण, हमारे ग्रामीण परिवारों को छोटी-मोटी जांचों और डिलीवरी के लिए भी मजबूरन जयपुर के बड़े अस्पतालों के चक्कर काटने पड़ते थे। इसमें समय तो बर्बाद होता ही था, साथ ही गरीब परिवारों पर पैसों का भी भारी बोझ पड़ता था।
लेकिन अब जोबनेर की हमारी मातृशक्ति को इस मानसिक और आर्थिक तनाव से हमेशा के लिए मुक्ति मिल गई है! कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ के प्रयासों से जोबनेर CHC में अब एक बेहतरीन महिला डॉक्टर (स्त्री रोग विशेषज्ञ) की स्थायी नियुक्ति हो चुकी है।
1. 22 साल का इंतजार खत्म: सिर्फ वादा नहीं, सीधा काम!
एक रिटायर्ड इंडियन आर्मी कर्नल और 2004 ओलंपिक पदक विजेता के रूप में कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ की एक ही कार्यशैली है—समस्या को देखो, योजना बनाओ और उसे तुरंत खत्म करो। जब वे अपने दौरों और रात्रि चौपालों के दौरान जोबनेर के लोगों से मिले, तो माताओं-बहनों ने अपनी इस तकलीफ को उनके सामने रखा। कर्नल राठौड़ ने इसे केवल एक मांग की तरह नहीं लिया, बल्कि इसे एक ‘मिशन’ माना। उन्होंने तुरंत राज्य के स्वास्थ्य विभाग से समन्वय किया और दशकों पुरानी इस समस्या को चंद दिनों में हल कर दिखाया। इसे ही कहते हैं जनता के प्रति सच्ची जवाबदेही।
2. ‘जनसंवाद’ की ताकत: जब जनता की आवाज सीधे सरकार तक पहुँचती है
जोबनेर अस्पताल में डॉक्टर की यह तैनाती कर्नल राठौड़ के अनोखे जनसंवाद मॉडल की एक बड़ी जीत है। कर्नल राठौड़ उन नेताओं में से नहीं हैं जो सिर्फ बड़े-बड़े भाषण देकर चले जाएं। वे खुद गांव की चौपालों पर, पार्कों में (पार्क संवाद) और बूथ स्तर की बैठकों में आम जनता के बीच बैठते हैं।
जब एक आम नागरिक बिना किसी हिचकिचाहट के अपने झोटवाड़ा विधायक को अपनी परेशानी बताता है, तो प्रशासन को भी तुरंत एक्शन लेना पड़ता है। जोबनेर CHC में डॉक्टर का आना इस बात का सबूत है कि इस सरकार में जनता की आवाज सबसे ऊपर है।
3. विकसित झोटवाड़ा: स्वास्थ्य से लेकर सड़कों तक चौतरफा विकास
जोबनेर में केवल अस्पताल का ही सुधार नहीं हुआ है, बल्कि कर्नल राठौड़ के Viksit Jhotwara development विजन के तहत इस पूरे ग्रामीण बेल्ट की तस्वीर बदली जा रही है:
- सड़कों का कायाकल्प: जोबनेर और आसपास के गांवों को आपस में जोड़ने के लिए ₹113 करोड़ की लागत से नई सड़कों का काम तेज़ रफ्तार से चल रहा है, ताकि मरीजों को अस्पताल तक आने में झटके न खाने पड़ें।
- ट्रेनों का ठहराव: ग्रामीणों की सुविधा के लिए जोबनेर-आसलपुर स्टेशन पर प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव सुनिश्चित कराया गया है।
- युवाओं को हुनर: इसके साथ ही स्वास्थ्य के साथ-साथ युवाओं के रोजगार के लिए आधुनिक आईटीआई (ITI) और कौशल केंद्र भी बनाए जा रहे हैं।
4. हर विभाग में कर्नल राठौड़ का ‘अनुशासन मॉडल’
चाहे वे Rajasthan IT minister 2026 के रूप में युवाओं को डिजिटल नौकरियों से जोड़ रहे हों या खेल मंत्री के रूप में गांवों में ओपन जिम बनवा रहे हों, कर्नल राठौड़ का एक ही लक्ष्य है—हर नागरिक का जीवन आसान बनाना। जोबनेर अस्पताल में डॉक्टर की नियुक्ति इसी ‘विकास-प्रथम’ सोच का एक हिस्सा है।
जोबनेर अस्पताल में महिला डॉक्टर का आना केवल एक नियुक्ति नहीं है, बल्कि यह हमारे ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं के अच्छे स्वास्थ्य और सम्मान की गारंटी है। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने यह साबित कर दिया है कि जब नेतृत्व अनुशासित और इरादे नेक हों, तो 22 साल पुरानी समस्या भी चुटकियों में हल हो जाती है। अब जोबनेर की माताओं-बहनों को इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा, क्योंकि उनकी सरकार उनके बेहद नजदीक है।