जयपुर, 27 अक्टूबर 2026। राजस्थान सरकार के कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने भारतीय ज्ञान परंपरा को देश की महत्वपूर्ण शक्ति बताते हुए कहा कि भारत का भविष्य अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए आधुनिक तकनीक और नवाचार को अपनाने में निहित है। उन्होंने युवाओं से अपनी संस्कृति पर गर्व करने और नए दौर की तकनीकों को सीखकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ मंगलवार को राजस्थान विश्वविद्यालय, जयपुर के राजस्थान अध्ययन केंद्र की ओर से आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी ‘राजस्थान का लोक साहित्य, कला एवं इतिहास’ के उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने भारतीय संस्कृति, लोक साहित्य, पारंपरिक ज्ञान, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक के बीच संबंधों पर अपने विचार रखे।
परंपरा और प्रगति का समन्वय भारत की असली ताकत
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि भारत ने प्रत्येक युग में समय के साथ आगे बढ़ने की क्षमता दिखाई है। तकनीक, संचार और अभिव्यक्ति के तरीके बदलते रहे हैं, लेकिन भारतीय सभ्यता की मूल चेतना और ज्ञान परंपरा निरंतर आगे बढ़ती रही है।
उन्होंने कहा कि साहित्य, लोककथाओं, लोकगीतों, कला और परंपराओं में केवल मनोरंजन या अभिव्यक्ति ही नहीं, बल्कि समाज के लंबे अनुभव और जीवन से मिली सीख भी समाहित होती है। इन परंपराओं को समझना और नई पीढ़ी तक पहुंचाना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
उनके अनुसार, विकास का अर्थ अपनी जड़ों से दूर होना नहीं है। वास्तविक प्रगति तब संभव है, जब देश अपनी विरासत से प्रेरणा लेकर आधुनिक चुनौतियों का समाधान खोजे।
राजस्थान की लोक संस्कृति में छिपा है अनुभव और ज्ञान
राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का उल्लेख करते हुए कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि मारवाड़, मेवाड़, ढूंढाड़, हाड़ौती और शेखावाटी जैसे क्षेत्रों की अलग-अलग बोलियां, लोक कलाएं और परंपराएं प्रदेश की विशिष्ट पहचान हैं। इन विविधताओं के बावजूद एक साझा सांस्कृतिक भावना सभी को जोड़ती है।
उन्होंने लोक साहित्य, कला और इतिहास को सांस्कृतिक चेतना के महत्वपूर्ण आधार बताते हुए कहा कि इनका संरक्षण आने वाली पीढ़ियों को अपनी पहचान, सामाजिक मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों से परिचित कराने के लिए आवश्यक है।
लोकगीतों और लोककथाओं में जीवन के अनुभव, सामाजिक संबंधों, प्रकृति और समुदाय के प्रति जिम्मेदारी जैसे विषय सहज रूप से अभिव्यक्त होते हैं। इस ज्ञान को आधुनिक माध्यमों के जरिए व्यापक स्तर पर साझा किया जा सकता है।
जल संरक्षण की पारंपरिक व्यवस्थाएं आज भी प्रासंगिक
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने राजस्थान की पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों को पूर्वजों की दूरदर्शिता का उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि सीमित जल संसाधनों और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बावजूद लोगों ने जोहड़, बावड़ियां, तालाब और कुंड जैसी व्यवस्थाएं विकसित कीं।
ये पारंपरिक प्रणालियां बताती हैं कि स्थानीय परिस्थितियों की समझ, सामुदायिक भागीदारी और प्रकृति के साथ संतुलन स्थापित करना कितना महत्वपूर्ण है। आज पर्यावरण संरक्षण और जल प्रबंधन की चुनौतियों के बीच भी इनसे प्रेरणा ली जा सकती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा का महत्व इसी बात में है कि उसमें निहित कई विचार वर्तमान समय की जरूरतों से भी जुड़े हुए हैं।
AI, डिजिटल तकनीक और नवाचार से जुड़े युवा
युवाओं को संबोधित करते हुए कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, अंतरिक्ष तकनीक, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में आगे बढ़ रहा है। इन क्षेत्रों में युवाओं की प्रतिभा, रचनात्मकता और नवाचार की महत्वपूर्ण भूमिका है।
उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक का उपयोग भारतीय भाषाओं, लोक साहित्य, पारंपरिक कलाओं और ऐतिहासिक विरासत को नए मंच उपलब्ध कराने के लिए किया जा सकता है। डिजिटल माध्यमों के जरिए राजस्थान की सांस्कृतिक कहानियों और ज्ञान को देश-दुनिया के अधिक लोगों तक पहुंचाने की संभावनाएं हैं।
युवाओं के लिए संदेश स्पष्ट है—अपनी विरासत को जानें, नई तकनीक सीखें और दोनों के मेल से नए अवसरों का निर्माण करें।
राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने कहा कि मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार प्रदेश की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और विकास के लिए प्रयासरत है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा भारतीय संस्कृति को ‘टाइमलेस’ बताए जाने का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हमारी परंपराओं की शक्ति उनकी निरंतर प्रासंगिकता और समाज को दिशा देने की क्षमता में है।
उन्होंने कहा कि भारत तकनीकी प्रगति और नवाचार के साथ दुनिया को विविधताओं में एकता, परिवार एवं समुदाय की शक्ति, कर्तव्य, प्रकृति के साथ संतुलन और सह-अस्तित्व जैसे मूल्य भी प्रदान करता है। इन मूल्यों को बनाए रखते हुए विकास की राह पर आगे बढ़ना आवश्यक है।
संगोष्ठी में कई गणमान्यजन रहे उपस्थित
राजस्थान विश्वविद्यालय के राजस्थान अध्ययन केंद्र द्वारा आयोजित इस अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रांत प्रचारक श्री बाबूलाल, राजस्थान विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. भगवती प्रसाद सारस्वत, मुख्यमंत्री शासन सचिवालय के सचिव श्री जितेन्द्र कुमार सोनी, राजस्थान अध्ययन केंद्र की निदेशक डॉ. दीपिका विजयवर्गीय सहित अन्य गणमान्यजन और युवा साथी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी में व्यक्त विचारों का मुख्य संदेश यही रहा कि सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक विकास एक-दूसरे के पूरक हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा को संरक्षित रखते हुए तकनीक और नवाचार अपनाना युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर सकता है और देश की सांस्कृतिक पहचान को वैश्विक स्तर पर मजबूत बना सकता है।
कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के सार्वजनिक कार्यक्रमों, विचारों और गतिविधियों से संबंधित जानकारी के लिए उनकी आधिकारिक वेबसाइट देखें। यह लिंक पाठकों को उनके बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने के लिए सीधे आधिकारिक ऑनलाइन स्रोत तक पहुंचाता है।
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