जयपुर। राजस्थान में स्कूली बच्चों की शारीरिक क्षमता का आकलन कर उनमें छिपी खेल प्रतिभाओं की पहचान करने की दिशा में पहल की जा रही है। इसके तहत बच्चों के फिटनेस टेस्ट के माध्यम से उनकी खेल क्षमता को समझने और उपयुक्त खेलों में आगे बढ़ने के अवसर उपलब्ध कराने पर ध्यान दिया जाएगा।
राजस्थान सरकार की ‘प्रतिभा’ पहल के तहत 5 से 15 वर्ष आयु वर्ग के बच्चों की वैज्ञानिक और मानकीकृत परीक्षण प्रक्रिया से प्रतिभा पहचान का लक्ष्य रखा गया है। इस व्यवस्था में स्कूल स्तर से लेकर जिला और राज्य स्तर तक मूल्यांकन की प्रक्रिया शामिल है।
स्कूल स्तर पर होगा शुरुआती मूल्यांकन
प्रतिभा पहचान प्रक्रिया के पहले चरण में विद्यार्थियों की शारीरिक और मोटर क्षमता का आकलन स्कूल स्तर पर किया जाएगा। इसमें 30 मीटर दौड़, स्टैंडिंग ब्रॉड जंप, फॉरवर्ड बेंड, स्टैंडिंग वर्टिकल जंप और शटल रन जैसे परीक्षण शामिल हैं। बच्चों की लंबाई और वजन भी दर्ज किए जाएंगे।
इस शुरुआती मूल्यांकन के आधार पर चयनित विद्यार्थियों को अगले चरण के लिए आगे बढ़ाया जाएगा।
जिला और राज्य स्तर पर होगी प्रतिभा की पहचान
स्कूल स्तर पर चयनित बच्चों का जिला स्तर पर दोबारा मूल्यांकन किया जाएगा। इस चरण में 800 मीटर दौड़ और मेडिसिन बॉल थ्रो जैसे परीक्षण शामिल हैं। इसके बाद राज्य स्तर पर चयनित प्रतिभागियों का विस्तृत मूल्यांकन किया जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य ग्रामीण, दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों सहित प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में मौजूद खेल प्रतिभाओं को पहचानने के अवसर उपलब्ध कराना है।
खेलों में आगे बढ़ने के लिए मिलेगा व्यवस्थित अवसर
खेल प्रतिभाओं की शुरुआती पहचान से बच्चों को उनकी क्षमता के अनुरूप प्रशिक्षण और खेलों में आगे बढ़ने का अवसर मिल सकता है। इसके लिए स्कूलों, जिला स्तर की समितियों और खेल संस्थाओं के बीच समन्वय महत्वपूर्ण होगा।
राजस्थान की खेल योजनाओं और प्रतिभा पहचान प्रक्रिया की जानकारी राजस्थान प्रतिभा पोर्टल पर उपलब्ध है। खेल गतिविधियों और विभागीय पहलों से जुड़ी जानकारी के लिए युवा मामले एवं खेल विभाग का पेज भी देखा जा सकता है।
स्कूल स्तर से खेल प्रतिभाओं की पहचान और उन्हें आगे प्रशिक्षण से जोड़ने की यह व्यवस्था प्रदेश में खेल विकास के लिए एक संरचित प्रक्रिया उपलब्ध कराने का प्रयास है।