वित्त वर्ष 2024 के दौरान मुद्रास्फीति औसतन 5.6 प्रतिशत रहने का अनुमान है एवं सितम्बर तक मुद्रास्फीति 6 प्रतिशत से ऊपर रहने की उम्मीद है। यह प्रतिक्रिया एचडीएफसी बैंक के चीफ इकोनोमिस्ट, अभीक बरूआ ने आज भारतीय रिजर्व बैंक द्वारा घोषित मौद्रिक नीति पर व्यक्त की।
सस्टेनेबल बेसिस एवं अल्पकालीन सब्जी की कीमतों के दबाव के जोखिम को देखते हुऐ रिजर्व बैंक ने मुद्रास्फीति को स्थायी रूप से वापस 4 प्रतिशत पर लाने का संकल्प दोहराया है।
रिजर्व बैंक ने अपनी नीतिगत दर को उम्मीद के मुताबिक 6.5 प्रतिशत पर अपरिवर्तित रखा लेकिन इसका संदेश कठोर था। यह वित्त वर्ष 2024 की इसकी तिमाही में मुद्रास्फीति में बढ़ोतरी के रूप में 100 बीपीएस से 6.2 प्रतिशत पर परिलक्षित हुआ एवं बैंकों के सीआरआर में वृद्धि के जरिये तरलता को मजबूत रखा। उत्तरार्द्ध में यह सिस्टम तरलता संतुलन में 60-70 हजार करोड़ रूपये की कमी ला सकता है जबकि आईसीआरआर के फैसले की सितंबर में समीक्षा की जानी है और यह एक अस्थायी निर्णय हो सकता है, लेकिन अगर मुद्रास्फीति का दबाव बना रहता है, तो टिकाऊ तरलता में सख्ती जारी रहने की संभावना है।