कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ का सार्वजनिक जीवन सैन्य सेवा, खेल और राजनीति के अलग-अलग अनुभवों से जुड़ा रहा है। भारतीय सेना में 26 वर्षों की सेवा के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर में काउंटर-टेररिज्म ऑपरेशंस और कारगिल युद्ध में भी भाग लिया। उनकी आधिकारिक प्रोफाइल के अनुसार, उन्हें 9वीं ग्रेनेडियर्स (मेवाड़) रेजिमेंट में 15 दिसंबर 1990 को कमीशन मिला था।
13 ग्रेनेडियर्स और सैन्य पृष्ठभूमि
13 ग्रेनेडियर्स का इतिहास राजस्थान के तनोट माता और 1971 के युद्ध से जुड़े सैन्य घटनाक्रमों के साथ चर्चा में रहा है। राज्यवर्धन राठौड़ की अपनी सैन्य पृष्ठभूमि ने भी उनके सार्वजनिक जीवन में अनुशासन और सेवा के अनुभव को एक महत्वपूर्ण संदर्भ दिया है। उनकी चार पीढ़ियों से जुड़ी सैन्य पारिवारिक पृष्ठभूमि का भी उल्लेख उनकी आधिकारिक वेबसाइट पर किया गया है।
खेल से सार्वजनिक जीवन तक
सेना से सेवानिवृत्ति के बाद राज्यवर्धन राठौड़ ने खेल और सार्वजनिक जीवन में अपनी पहचान बनाई। उन्होंने 2004 एथेंस ओलंपिक में शूटिंग में भारत के लिए रजत पदक जीता। उनकी आधिकारिक प्रोफाइल में Commonwealth Games और Asian Games सहित अन्य अंतरराष्ट्रीय उपलब्धियों का भी उल्लेख है।
झोटवाड़ा में जनसुनवाई और संवाद
वर्तमान में झोटवाड़ा से विधायक के रूप में राठौड़ क्षेत्रीय लोगों से संवाद और जनसुनवाई से जुड़ी गतिविधियों में भी शामिल रहे हैं। अक्टूबर 2026 में झोटवाड़ा में आयोजित जनसुनवाई के दौरान उन्होंने स्थानीय नागरिकों, पूर्व सैनिकों और सेना के जवानों की समस्याएं सुनीं और संबंधित अधिकारियों से आवश्यक कार्रवाई पर चर्चा की।
इस तरह 13 ग्रेनेडियर्स और सैन्य सेवा से जुड़े अनुभवों से लेकर खेल उपलब्धियों और झोटवाड़ा में जनसुनवाई तक, राज्यवर्धन राठौड़ के सार्वजनिक जीवन के अलग-अलग पहलू सामने आते हैं। उनकी गतिविधियों से जुड़े नए अपडेट आधिकारिक News & Updates सेक्शन में देखे जा सकते हैं।