राजस्थान में रोजगार के अवसर बढ़ाने, औद्योगिक निवेश को प्रोत्साहित करने और युवाओं को बाजार की जरूरतों के अनुरूप कौशल प्रदान करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ राज्य सरकार में उद्योग एवं वाणिज्य तथा कौशल विकास, रोजगार एवं उद्यमिता से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इन क्षेत्रों में उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में निवेश को बढ़ावा देना, प्रशिक्षण को रोजगार से जोड़ना और युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसरों को प्रोत्साहित करना शामिल है।
रोजगार सहायता शिविरों से युवाओं को अवसर
युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए रोजगार सहायता शिविर एक महत्वपूर्ण माध्यम हैं। 17 जुलाई 2026 को जयपुर के श्री प्रताप स्टेडियम, चित्रकूट में आयोजित रोजगार सहायता शिविर में 50 नियोजकों ने करीब 1,321 युवाओं का रोजगार के लिए चयन किया और 18 युवाओं को मौके पर नियुक्ति पत्र दिए गए। इस कार्यक्रम में कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने युवाओं को उनकी योग्यता और कौशल के अनुरूप अवसर उपलब्ध कराने के महत्व पर जोर दिया।
रोजगार मेलों के साथ करियर मार्गदर्शन, प्रशिक्षण और नियोजकों से सीधा संपर्क युवाओं को रोजगार की संभावनाओं से परिचित कराने में मदद कर सकते हैं।
उद्योग और निवेश को बढ़ावा
राजस्थान में औद्योगिक विकास को गति देने के लिए निवेश आकर्षित करना, उद्योगों की प्रक्रियाओं को आसान बनाना और छोटे व मध्यम उद्यमों को सहयोग देना महत्वपूर्ण है। उद्योग एवं वाणिज्य विभाग की प्राथमिकताओं में औद्योगिक परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी, उद्यमियों की समस्याओं का समाधान और स्थानीय उत्पादों को बाजार उपलब्ध कराना शामिल है।
राज्य में MSME, स्टार्टअप, कारीगरों और पारंपरिक उद्यमों को तकनीकी तथा वित्तीय सहायता देने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इससे नए व्यवसायों को बढ़ावा देने और रोजगार के अवसर पैदा करने में मदद मिल सकती है।
विभाग की नीतियों और निवेश से जुड़ी जानकारी के लिए आधिकारिक उद्योग एवं वाणिज्य विभाग पेज देखा जा सकता है।
कौशल विकास और ITI का आधुनिकीकरण
रोजगार के लिए केवल शैक्षणिक योग्यता पर्याप्त नहीं होती; उद्योगों की जरूरतों के अनुसार व्यावहारिक प्रशिक्षण भी जरूरी है। इसी उद्देश्य से ITI, कौशल प्रशिक्षण और अप्रेंटिसशिप कार्यक्रमों को उद्योगों से जोड़ने पर जोर दिया जा रहा है।
13 फरवरी 2026 को कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और राजस्थान सरकार की समीक्षा बैठक में PM-SETU, अप्रेंटिसशिप और अंतरराष्ट्रीय कौशल विकास से जुड़ी योजनाओं पर चर्चा हुई। PIB के अनुसार, उस समय राजस्थान में PMKVY 4.0 के तहत 3.14 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित या प्रशिक्षण के लिए उन्मुख किया गया था, जिनमें 2.50 लाख से अधिक प्रमाणित हुए थे। राष्ट्रीय अप्रेंटिसशिप प्रोत्साहन योजना के तहत 31 जनवरी 2026 तक 1.04 लाख से अधिक अप्रेंटिस विभिन्न प्रतिष्ठानों से जुड़े थे।
उद्यमिता और भविष्य के रोजगार
कौशल विकास के साथ स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देना भी जरूरी है। डिजिटल तकनीक, इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक वाहन सेवा, पर्यटन और विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षण युवाओं को बदलती रोजगार जरूरतों के लिए तैयार कर सकता है।
राजस्थान के कौशल विकास एवं उद्यमिता विभाग पर प्रशिक्षण, अप्रेंटिसशिप और रोजगार से संबंधित पहलों की जानकारी उपलब्ध है।
रोजगार और औद्योगिक विकास के बीच तालमेल
रोजगार, निवेश और कौशल विकास एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। उद्योगों को प्रशिक्षित कर्मचारी मिलने से उत्पादन क्षमता बढ़ाने में मदद मिलती है, जबकि युवाओं को व्यावहारिक कौशल और रोजगार के अवसर मिलते हैं। कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से जुड़े इन विभागों की पहलों में उद्योगों की जरूरतों, प्रशिक्षण और रोजगार के बीच बेहतर तालमेल स्थापित करना एक प्रमुख विषय है।
इन पहलों की प्रगति, नई घोषणाओं और विभागीय गतिविधियों के लिए आधिकारिक News & Updates सेक्शन देखा जा सकता है।