राजस्थान का हर जिला देश को सैनिक देता है। हर गाँव में कोई न कोई ऐसा परिवार है जिसने अपना बेटा, भाई, या पति वर्दी में भेजा है। लेकिन जब वो सैनिक सेवानिवृत्त होकर घर लौटता है — या जब उसका परिवार किसी सरकारी सहायता के लिए जाना चाहता है — तो उन्हें जिले में एक ऐसी जगह मिलनी चाहिए जो सिर्फ उनके लिए हो।
डीडवाना — नागौर जिले का एक कस्बा — को यह सुविधा मिलना बाकी था। जब तक कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, राजस्थान के सैनिक कल्याण मंत्री, ने वहाँ राजस्थान के पहले समर्पित सैनिक कल्याण भवन का उद्घाटन नहीं किया।
यह एक इमारत का उद्घाटन नहीं था। यह एक वादे का पूरा होना था।
सैनिक कल्याण भवन — यह है और यह क्यों ज़रूरी था
एक सैनिक कल्याण भवन वह जगह है जहाँ राजस्थान के पूर्व सैनिक, शहीदों की विधवाएं, और उनके परिवार — एक ही छत के नीचे — अपनी सभी ज़रूरतें पूरी कर सकते हैं:
* पेंशन से जुड़ी समस्याओं का समाधान — SPARSH portal की मदद से
* सरकारी नौकरियों में reservation का फायदा कैसे लें — जानकारी और guidance
* बच्चों की scholarship के लिए आवेदन — सैनिक स्कूलों और defence institutes के लिए
* शहीद परिवारों को ex-gratia lump sum की जानकारी और आवेदन
* भूमि और नकद पुरस्कार — gallantry awardees के लिए Rajasthan नियमों के तहत
* Medical सहायता — ECHS और राज्य स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ कैसे उठाएं
पहले इन सब कामों के लिए परिवारों को कई अलग-अलग दफ्तरों के चक्कर काटने पड़ते थे — जिला कलेक्टर कार्यालय, पेंशन विभाग, जिला सैनिक कल्याण कार्यालय। अब एक ही जगह से सब होगा।
💬 कर्नल राठौड़ ने क्या कहा
“हमारा लक्ष्य है कि राजस्थान का हर पूर्व सैनिक एक ऐसे digital platform पर सभी welfare जानकारी तक आसानी से पहुँच सके।” — कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, राज्य सैनिक बोर्ड बैठक, अक्टूबर 2025 (Source: ProKerala/ANI)
एक पूर्व सैनिक खुद मंत्री है — यही सबसे बड़ा फर्क है
ज़्यादातर राज्यों में सैनिक कल्याण मंत्री वो होते हैं जिन्होंने कभी वर्दी नहीं पहनी। राजस्थान में मंत्री खुद कर्नल हैं।
कर्नल राठौड़ की Wikipedia profile के अनुसार — 23 साल की सैन्य सेवा, जम्मू-कश्मीर में counter-terrorism operations, कारगिल युद्ध में भागीदारी, AVSM पुरस्कार। वो जानते हैं एक सैनिक का जीवन कैसा होता है — और वो जानते हैं एक सैनिक के परिवार को क्या चाहिए होता है।
इसीलिए जब वो डीडवाना में एक भवन का उद्घाटन करते हैं — तो वो सिर्फ फीता नहीं काटते। वो उस परिवार की आँखों में देखते हैं जिसका बेटा सीमा पर है, और कहते हैं: “जब तक वो वहाँ है — हम यहाँ आपके साथ हैं।”
राजस्थान के सैनिकों की ताकत — कुछ आँकड़े
| 7 लाख+
पूर्व सैनिक — राजस्थान में |
75+
PVC/MVC विजेता — राजस्थान से |
40
पूर्व सैनिक — RAS में चुने 2025 |
250+
रोज़गार — Education Scheme 2025 |
राजस्थान ने अब तक 75 से अधिक Param Vir Chakra और Maha Vir Chakra विजेता दिए हैं — भारत के किसी भी राज्य से सबसे ज़्यादा। 15 जनवरी 2026 को जब Jaipur में पहली बार Army Day Parade आयोजित हुई — तो यह उसी बलिदान की राष्ट्रीय स्वीकृति थी।
और अक्टूबर 2025 में ProKerala ने report किया कि ₹406.46 लाख के fund approval के साथ, इस साल 250 से ज़्यादा पूर्व सैनिकों को नौकरी मिली और 40 ने सीधे Rajasthan Administrative Service में जगह पाई।
₹15,000 प्रतिमाह — WW2 Veterans को भी याद रखा गया
एक ऐसी बात जो बहुत कम लोग जानते हैं: राजस्थान सैनिक कल्याण विभाग द्वितीय विश्व युद्ध (1939-1945) के उन पूर्व सैनिकों या उनकी विधवाओं को — जिन्हें कहीं से कोई pension नहीं मिल रही — ₹15,000 प्रति माह pension देता है, जिसे August 2024 में बढ़ाया गया था।
यह 80 साल पुराने एक कर्ज़ को चुकाने जैसा है। उन लोगों को याद रखना जिन्हें बाकी सब भूल चुके हैं — यही राजस्थान सरकार की नीति है, और यही कर्नल राठौड़ का commitment है।
सैनिक कल्याण की सभी योजनाओं, नए भवनों की जानकारी, और आवेदन प्रक्रिया के लिए: सैनिक कल्याण विभाग पेज देखें। News Updates पर नई घोषणाएं मिलती हैं। contact करें अगर कोई welfare issue है।
क्योंकि जब देश के लिए लड़ने वाला एक सैनिक मंत्री बनता है — तो सैनिकों का हक मिलना सिर्फ नीति नहीं, जिम्मेदारी बन जाती है।