Thursday, April 30, 2026

खड़गे के बयान पर राठौड़ का सधा हुआ जवाब, क्यों है चर्चा में?

राजनीति में बड़े नेता का जवाब देना एक कला है। गुस्से में जवाब दें — तो ध्यान मुद्दे से हट जाता है। चुप रहें — तो सहमति मान ली जाती है। पर जब कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ ने 23 अप्रैल 2026 को श्रीनगर में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे के PM मोदी पर टिप्पणी का जवाब दिया — वह न गुस्सा था, न चुप्पी। वह एक सधा हुआ, तथ्य-आधारित जवाब था।

और इसीलिए वह पाँच बड़े अखबारों में अगले दिन छपा।

खड़गे ने क्या कहा — और राठौड़ ने क्या जवाब दिया

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने PM नरेंद्र मोदी के बारे में एक ऐसी टिप्पणी की जिसे कर्नल राठौड़ ने “आतंकवादी” शब्द के इस्तेमाल से जोड़ते हुए संवैधानिक पद पर हमला बताया। श्रीनगर में प्रेस कॉन्फ्रेंस में राठौड़ ने कहा:

राठौड़ के सटीक शब्द — Kashmir Reader, 23 अप्रैल 2026: “शारीरिक हिंसा होती है, और फिर वर्बल वायलेंस भी होती है। इतना वरिष्ठ राजनेता एक संवैधानिक पद के खिलाफ ऐसा व्यवहार करे — यह चुनावी हताशा है। देखिए सोच, बुद्धि और संस्कृति कहाँ चले गए।”

राठौड़ ने आगे कहा: “यह उन करोड़ों भारतीयों पर हमला है जिन्होंने PM मोदी को चुना। इसकी निंदा होनी चाहिए।”

यह जवाब ‘सधा हुआ’ क्यों था — तीन कारण

  • व्यक्तिगत नहीं, संस्थागत तर्क: राठौड़ ने खड़गे पर व्यक्तिगत हमला नहीं किया। उन्होंने कहा — यह PM का अपमान नहीं, संवैधानिक पद का अपमान है। और उस पद को करोड़ों मतदाताओं ने चुना।
  • शब्दों का चुनाव — “Verbal Violence”: यह phrase तुरंत viral हुआ क्योंकि यह नई भाषा थी। भौतिक हिंसा और शाब्दिक हिंसा — दोनों समाज को तोड़ती हैं। इस फ्रेमिंग ने बहस को नया आयाम दिया।
  • एक ही प्रेस कॉन्फ्रेंस में तीन मुद्दे: खड़गे वाले जवाब के साथ राठौड़ ने महिला आरक्षण, J&K का दर्जा, और बंगाल की स्थिति पर भी बात की। एक सवाल का जवाब दिया, फिर एजेंडा अपने हाथ में ले लिया।

राजनीति से परे — असली संदेश क्या है

कर्नल राठौड़ का यह जवाब केवल BJP-Congress की लड़ाई नहीं था। यह एक बड़े सिद्धांत की अभिव्यक्ति थी जो उनके विचारों में बार-बार आता है: लोकतंत्र संस्थाओं पर टिका है, व्यक्तियों पर नहीं। जब कोई संवैधानिक पद पर हमला करता है — चाहे किसी भी दल का हो — वह उन करोड़ों लोगों का अपमान करता है जिन्होंने उस पद को अपना विश्वास दिया।

Army में 23 साल बिताने वाले एक अधिकारी के लिए — जहाँ rank और institution का सम्मान अनुशासन की नींव होती है — यह सिद्धांत कोई राजनीतिक बात नहीं। यह स्वभाव है। कर्नल राठौड़ के ताज़ा बयान और अपडेट यहाँ पढ़ें।

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